सुंदरता देखने वालों की आँखों में होती है
एक लड़का था…
उसके बिखरे बाल भी बड़े कमाल लगते थे,
और हँसी में जो गड्ढा पड़ता,
बस दिल ही खो जाता।
उसके बिखरे बाल भी बड़े कमाल लगते थे,
और हँसी में जो गड्ढा पड़ता,
बस दिल ही खो जाता।
मैं कुछ बोलती,
तो बस मुस्कुराकर कहता—
"अरे, बातें करना सीख ले।"
सफ़ेद शर्ट में तो और भी जंचता था,
शरमाते हुए उसका अंदाज़…
बस दिल खुश हो जाता।
तो बस मुस्कुराकर कहता—
"अरे, बातें करना सीख ले।"
सफ़ेद शर्ट में तो और भी जंचता था,
शरमाते हुए उसका अंदाज़…
बस दिल खुश हो जाता।
उससे दिल की हर बात हो जाती थी,
वह सुनता, समझता, मुस्कुराता, और फिर समझा भी देता।
मैं खुद को कुछ बोलूँ,
तो वह कहता—
"सुंदरता तो देखने वालों की आँखों में होती है।"
मैं सज़कर जाती,
तो वह पीछे से नज़र चुराकर देखता,
और मुझे जैसे और भी प्यारा लगता।
वह सुनता, समझता, मुस्कुराता, और फिर समझा भी देता।
मैं खुद को कुछ बोलूँ,
तो वह कहता—
"सुंदरता तो देखने वालों की आँखों में होती है।"
मैं सज़कर जाती,
तो वह पीछे से नज़र चुराकर देखता,
और मुझे जैसे और भी प्यारा लगता।
बातों-बातों में समय निकल जाता,
और मैं सोचती
ना जाने फिर कब मिलेंगे,
कहां होंगे, कैसी हालत में होंगे।
पर वो लड़का…
मोहब्बत का शगुन था।
और मैं सोचती
ना जाने फिर कब मिलेंगे,
कहां होंगे, कैसी हालत में होंगे।
पर वो लड़का…
मोहब्बत का शगुन था।
अगर कह पाती,
तो बस इतना कहती—
जब मैं खुद से पूछती, कोई मुझसे प्यार क्यों करेगा…
तो बस उसकी हँसी याद आती,
और वो शब्द—
"सुंदरता देखने वालों की आँखों में होती है।"
तो बस इतना कहती—
जब मैं खुद से पूछती, कोई मुझसे प्यार क्यों करेगा…
तो बस उसकी हँसी याद आती,
और वो शब्द—
"सुंदरता देखने वालों की आँखों में होती है।"
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